Indus valley civilisation in hindi Part-1 | सिंधु घाटी सभ्यता | हड़प्पा सभ्यता

indus valley civilisation सिंधु घाटी सभ्यता

Indus valley civilisation or Indus civilisation or Haddpa Civilisation सिंधु घाटी सभ्यता (Indus valley civilisation in hindi)। इस खंड से लगभग सभी प्रतियोगिता परीक्षा में प्रश्न पूछे जाते हैं जो सिंधु सभ्यता के स्थल इसके उत्खननकर्ता, सिंधु सभ्यता का कालखंड आदि से प्रश्न पूछे जाते हैं जिसे इस लेख में शामिल किया गया है। 

Indus Valley Civilisation (सिंधु घाटी सभ्यता)

भारतीय उपमहाद्वीप में उदित सिंधु घाटी सभ्यता इतिहासविदों के लिए एक कौतूहल का विषय रहा है क्योंकि यह सभ्यता एक नगरीकृत सभ्यता थी जिसकी विशेषताएं वर्तमान के साथ समानता रखती हैं। 

सिंधु घाटी सभ्यता का परिचय (Introduction to Indus Valley Civilisation)

एक लंबे समय तक प्राचीन भारतीय इतिहास के विषय में जानकारी का अभाव था किन्तु हड़प्पा सभ्यता (सिंधु घाटी सभ्यता) के प्रकाश में आने के बाद एक विकसित एवं सुव्यवस्थित नगरीकृत सभ्यता का ज्ञान हुआ। यह सभ्यता अपने विशिष्ट नगर नियोजन और जल निकासी व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध है।

सिंधु घाटी सभ्यता (Indus valley civilsation)

सर्वप्रथम चार्ल्स मैसन 1826 ई. हड़प्पा नामक स्थल पर एक प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिलने के प्रमाण की पुष्टि की थी।

सन् 1921 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के महानिदेशक सर जान मार्शल के निर्देशन में दयाराम साहनी ने पाकिस्तान के पंजाब के माण्टगोमरी जिले में रावी नदी के तट पर स्थित हड़प्पा का अन्वेषण किया।

सिंधु घाटी की सभ्यता आद्य इतिहास का उदाहरण माना जाता है। आद्य इतिहास, इतिहास के उस कालखंड को कहा जाता है जिसका लिखित अथवा पुरातात्विक साक्ष्य मिलता है। इस दृष्टिकोण से सिंधु घाटी सभ्यता  आद्य इतिहास का उदाहरण है क्योंकि इस सभ्यता के प्राप्त लिपि को अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।

सिंधु घाटी सभ्यता का नामकरण (Nomenclature of Indus Valley Civilisation)

इस सभ्यता के लिए साधारणतः तीन नामों का प्रयोग किया जाता  है- ‘सिन्धु सभ्यता’, ‘सिन्धु घाटी सभ्यता’ और ‘हड़प्पा सभ्यता’

प्रारम्भ में जब पश्चिमी पंजाब (पाकिस्तान) के हड़प्पा एवं तत्पश्चात् मोहनजोदड़ों की खोज हुई, तब यह सोचा गया कि यह सभ्यता अनिवार्यतः सिन्धु घाटी तक सीमित थी इसी आधार पर इसे सिन्धु घाटी की सभ्यता का नाम दिया गया।

पुरातत्व शास्त्र की एक परंपरा रही  है कि किसी नए सभ्यता के खोजे गए प्रथम साक्ष्य के स्थल के  नाम के आधार पर उसका नामकरण किया जाता है। इस सभ्यता के विषय में सबसे पहले 1921 में हड़प्पा के उत्खनन के बाद ज्ञात हुआ इसलिए इसे ‘हड़प्पा सभ्यता’ कहा जाता है। 

इस विकसित हड़प्पा संस्कृति का केन्द्र-स्थल पंजाब और सिन्ध में मुख्यतः सिन्धु  नदी घाटी में पड़ता है इसलिए इसे सिंधु सभ्यता कहा जाता है। सर्वप्रथम इसे सिन्धु सभ्यता का नाम जान मार्शल ने दिया।

इस सभ्यता के अब तक 2000 से अधिक स्थल प्रकाश में आ चुके हैं जो सिंधु नदी तंत्र के अलावे अन्य क्षेत्रों से भी मिलें हैं।

भारत के विभाजन के बाद अधिकांश उत्खनित स्थल पाकिस्तान मे चले गए किन्तु दो स्थल कोटला निहंग खाँ (रोपड़) सतलज नदी पर तथा रंगपुर मादर नदी के तट पर (काठियावाड़) भारतीय सीमा क्षेत्र में शेष बचे हैं।

सिंधु घाटी सभ्यता का काल खंड (Period of Indus Valley Civilisation)

सैन्धव सभ्यता की तिथि को निर्धारित करना भारतीय पुरातत्व का विवादग्रस्त विषय है। 

वस्तुत: इस सभ्यता के पूर्व ज्ञात सभी सभ्यताओं का एक विकास क्रम मिलता है तथा इनका पतन भी क्रमिक हुआ। किन्तु सिंधु घाटी सभ्यता आरम्भ से ही विकसित रूप में दिखाई पड़ती है तथा इसका पतन भी आकस्मिक प्रतीत होता है।

ऐसी स्थिति में कुछ भी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता है कि इस सभ्यता का काल खंड क्या था। विभिन्न विद्वानों ने विभिन्न आधारों पर इसका कल निर्धारण निम्न रूप में किया है-

 

क्र. सं.  विद्वान  निर्धारित कालखंड 

 

जान मार्शल

 

अर्नेस्ट मैके

3250.- 2750 ई.पू.

 

2800 – 2500 ई.पू.

3 माधो स्वरूप वत्स 2700 – 2500 ई.पू.
4 मार्टीमर व्हीलर 2500 -1500 ई.पू.
5 सी.जे. गैड 2350 -1750 ई.पू.
6 फेयर सर्विस 2000 -1500 ई.पू.
7 कार्बन डेटिंग (C-14) 2500 – 1750 ई.पू.

 

नवीनतम अध्ययन के अनुसार यह सभ्यता लगभग 400-500 वर्षों तक विद्यमान रही तथा 2200 ई.पू. से 2000 ई.पू. के मध्य यह अपने परिपक्व अवस्था में थी।

सिंधु घाटी सभ्यता के स्थल एवं उत्खनन  (Indus Valley Civilisation Sites and Excavations)

 

क्रं सं  स्थल  उत्खनन वर्ष  उत्खनन कर्ता  स्थल की स्थिति 
हड़प्पा 1921  दयाराम साहनी माण्टगोमरी जिला, पंजाब (पाकिस्तान)
मोहनजोदड़ो 1922 आर.डी. बनर्जी लड़काना जिला, सिन्ध (पाकिस्तान)
3 सुत्कागेडोर 1927 आर.एल. स्टाइन बलूचिस्तान (पाकिस्तान)
4 चन्हदड़ो 1931 एम.जी, मजूमदार सिन्ध (पाकिस्तान)
5 रंगरपुर  1935-47 माधास्वरूप वत्स अहमदाबाद (काठियावाड, भारत)
6 कोटदीजी 1935 धुर्य सिन्ध (पाकिस्तान)
7 रोपड़ 1953-55  यज्ञदत्त शर्मा पंजाब (भारत)
8 कालीबंगा 1953 ए.  घोष  गंगानगर (राजस्थान)
9 लोथल 1955-63 एस.आर. राव अहमदाबाद (काठियावाड़)
10` आलमगीरपुर 1958 यज्ञदत्त शर्मा मेरठ (उ.प्र.)
11 सुरकोटदा 1972-75 जगतपति जोशी कच्छ (गुजरात)
12 बनवाली 1973-74 आर.एस. विष्ट  हिसार (हरियाणा)
13 धौलावीरा 1990-91 आर.एस. विष्ट कच्छ का रन (गुजरात)
14  राखीगढ़ी 1997-99 अमरेन्द्र नाथ हरियाणा
15 दैमाबाद 1974-79 जे.पी. जोशी अहमदानगर (महाराष्ट्र)
16 देसलपुर 1963-64 के.वी. सौन्दरराजन कच्छ (गुजरात)

 

सिंधु घाटी सभ्यता का विस्तार (Extent of Indus Valley Civilisation)

हड़प्पा सभ्यता का 80% विस्तार सरस्वती-हकरा नदी घाटी के आस-पास है।

अब तक इस सभ्यता के अवशेष पाकिस्तान में सिन्ध, बलूचिस्तान और भारत में पंजाब, गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी उ.प्र., जम्मू-कश्मीर, पश्चिमी महाराष्ट्र के भागों में पाये गए हैं।

सिंधु घाटी सभ्यता विस्तार

 इस सभ्यता का सर्वाधिक पश्चिमी पुरास्थल सुत्कागेडोर (बलूचिस्तान), पूर्वी पुरास्थल आलमगीर उत्तरी पुरास्थल माँडा (जम्मू) तथा दक्षिणी पुरास्थल दैमाबाद है।

इस त्रिभुजाकार क्षेत्र का क्षेत्रफल वर्तमान में लगभग 15 लाख वर्ग किमी. है।

इस सभ्यता के विस्तार के आधार पर ही स्टुअर्ट पिग्गट ने हड़प्पा एवं मोहनजोदड़ों को एक विस्तृत साम्राज्य की जुड़वा राजधानियाँ बताया है।

 

सिन्धु सभ्यता के निर्माता (Creator of Indus Civilisation)

सिन्धु घाटी सभ्यता के प्रवर्तकों या मूल संस्थापकों के सम्बन्ध में हमारी उपलब्ध जानकारी केवल समकालीन खण्डहरों से प्राप्त मानव कंकाल और कपाल (खोपड़ियाँ) हैं।

प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर माना जाता है कि मोहनजोदड़ों की जनसंख्या एक मिश्रित प्रजाति की थी जिसमें कम से कम चार प्रजातियाँ थीं-

  1. प्रोटो-आस्ट्रेलाइड (काकेशियन), 2. भूमध्य सागरीय, 3. अल्पाइन, 4. मंगोलियन

आमतौर पर यही धारणा है कि मोहनजोदड़ों के लोग मुख्यतः भूमध्यसागरीय प्रजाति के थे।

सिन्धु सभ्यता के प्रवर्तकों को द्रविड़, ब्राहुयी, सुमेरियन, पणि, असुर, वृत्य, बाहीक, दास, नाग, आर्य प्रजातियों से सम्बन्धित बताया जाता है।

परन्तु अधिकांश विद्वान इस मत से सहमत हैं कि द्रविड़ ही सैन्धव सभ्यता के निर्माता थे।

क्रं सं  विद्वान  सिंधु सभ्यता के निर्माता 
डा. लक्ष्मण स्वरूप और रामचन्द्र आर्य
गार्डन चाइल्ड सुमेरियन
राखाल दास बनर्जी द्रविड़
व्हीलर  दस्यु एवं दास

 

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Q. सिंघू घाटी सभ्यता की खोज कब हुई?

Ans. सिंधु घाटी सभ्यता की खोज 1921 में दयाराम साहनी के द्वारा की गई थी हालाकि इसके पहले ही 1826 में इस स्थल पर एक प्राचीन सभ्यता के होने की जानकारी चार्ल्स मैसन ने दी थी।

Q. सिंघू घाटी सभ्यता की पहचान क्या है?

Ans. सिंधु सभ्यता की पहचान उत्खनन से प्राप्त मुहरें, कांसे की नर्तकी की मूर्ति, प्रस्तर मूर्तियाँ, वृहत स्नानागार, अन्नागार, नगरीकृत सभ्यता आदि हैं।

Q. सिंघू घाटी सभ्यता की लिपि का क्या नाम था ?

Ans. सिंघू घाटी सभ्यता की लिपि का नाम सिंधु लिपि है जो एक चित्रात्मक लिपि है। यह लिपि 1923 में प्रकाश में आई थी, सिंधु लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है।

Q. सिंधु घाटी का दूसरा नाम क्या है?

Ans. सिंधु घाटी का दूसरा नाम सिंधु-सरस्वती सभ्यता तथा हड़प्पा सभ्यता है।

Q. सिंधु सभ्यता का स्थल हड़प्पा किस नदी के किनारे अवस्थित था?

Ans. हड़प्पा पाकिस्तान में रावी नदी के तट पर अवस्थित था, जिसकी खुदाई सबसे पहले की गई थी।

Q. हड़प्पा सभ्यता का सर्वप्रथम खोजा गया स्थल कौन सा है?

Ans. सिंधु घाटी सभ्यता में सबसे पहले खोज गया स्थल हड़प्पा था।

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