Bihar Economic Survey 2022-Important facts

Bihar Economic Survey 2022

Bihar Economic Survey 2022:

बिहार सरकार ने विधानसभा के बजट सत्र में बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2022 (Bihar Economic Survey 2022) को पेश किया जिसमें करोना महामारी के दौरान अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन के साथ राज्य की अर्थव्यवस्था के अन्य पहलुओं पर चर्चा की गई है। 

बिहार आधारित विभिन्न परीक्षाओं जैसे BPSC, Bihar SI, Bihar SSC आदि, में Bihar Economic Survey 2022 से प्रश्न पूछे जाते हैं इन्हे ध्यान में रखकर तथ्यों का संकलन किया गया है, जिनका अध्ययन किया जा सकता है। 

Bihar Economic Survey 2022/ बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2022

अध्याय 1: बिहार की अर्थव्यवस्था : एक अवलोकन

    • 2020-21 में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद कोविड-19 के प्रभाव के कारण 2.5 प्रतिशत ही बढ़ा।
    • 2020-21 में बिहार का सकल राज्य घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्य पर 618.63 हजार करोड़ रु. और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर 419.88 हजार करोड़ रु. था।
    • वहीं, 2020-21 में बिहार का निवल राज्य घरेलू उत्पाद वर्तमान मूल्य पर 566.47 हजार करोड़ रु. और 2011-12 के स्थिर मूल्य पर 379.55 करोड़ रु. था।
    • इसके आधार पर 2020-21 राज्य में 2011-12 के स्थिर मूल्य पर प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद 34,314 रु. था जो 2019-20 के 33,979 रु. से थोड़ा अधिक था। वहीं, 2020-21 में वर्तमान मूल्य पर प्रति व्यक्ति सकल राज्य घरेलू उत्पाद 2019-20 के 49,272 रु. से 2.5 प्रतिशत बढ़कर 50,555 रु. हो गया
    • सकल राज्य घरेलू उत्पाद में अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों का योगदान –
क्र सं क्षेत्र सकल राज्य घरेलू उत्पाद में योगदान % में  
प्राथमिक क्षेत्र19.2  प्रतिशत 
द्वितीयक क्षेत्र19.5  प्रतिशत
तृतीयक क्षेत्र61.2 प्रतिशत 

 

    • वर्ष 2016-17 से 2020-21 तक की अवधि में प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि दर 2.3 प्रतिशत रही है। लेकिन वार्षिक वृद्धि दरों में काफी अंतर रहा है जो 2018-19 में (-) 0.3 प्रतिशत था जो 2016-17 में 8.7 प्रतिशत। वहीं, द्वितीयक क्षेत्र में मध्यकालिक वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रही है और तृतीयक क्षेत्र में वृद्धि दर सर्वाधिक 8.5 प्रतिशत रही है। 
    • वर्ष 2019-20 में प्रति व्यक्ति सकल जिला घरेलू उत्पाद के संबंध में 38 जिलों की रैंकिंग में 1.31 लाख रु. के साथ पटना जिला शीर्ष पर था जबकि सबसे कम 0.19 लाख रु. प्रति व्यक्ति सकल जिला घरेलू उत्पाद शिवहर जिले का था।
    • सितंबर 2020 से सितंबर 2021 के बीच वार्षिक मुद्रास्फीति दर ग्रामीण 2.8 प्रतिशत, शहरी 4.9 प्रतिशत और समग्र 3.1 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मुद्रास्फीति दर बिहार में भारत से कम थी लेकिन शहरी क्षेत्रों में बिहार की मुद्रास्फीति दर भारत से अधिक थी।

अध्याय 2 : राजकीय वित्तव्यवस्था

    • वर्ष 2020-21 कोविड-19 महामारी का पहला वर्ष था जिसने आर्थिक वृद्धि पर नकारात्मक प्रभाव डाला।
    • वर्ष 2020-21 में राज्य सरकार द्वारा किया गया कुल व्यय गत वर्ष की अपेक्षा 13.4 प्रतिशत बढ़कर 1,65,696 करोड़ रु. हो गया। इसमें 26,203 करोड़ रु. पूंजीगत व्यय था और 1,39,493 करोड़ रु. राजस्व व्यय। वर्ष 2020-21 में राज्य सरकार की राजस्व प्राप्तियां 1,28,168 करोड़ रु. थीं और पूंजीगत प्राप्तियां 36,735 करोड़ रु.।
    • सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत में कुल व्यय 2019-20 के 23.7 प्रतिशत से बढ़कर 2020-21 में 26.8 प्रतिशत हो गया। सकल राज्य घरेलू उत्पाद के हिस्से के रूप में पूंजीगत व्यय 2019-20 के 3.3 प्रतिशत से बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गया।
    • जहां पूंजीगत व्यय गत वर्ष से 30.5 प्रतिशत बढ़ा वहीं राजस्व व्यय 10.7 प्रतिशत बढ़ा। इसी अवधि में पूंजीगत प्राप्तियों की वृद्धि दर 25.9 प्रतिशत और राजस्व प्राप्तियों की वृद्धि 3.2 प्रतिशत थी।
    • राजस्व लेखे में सामान्य सेवाओं पर व्यय 11.1 प्रतिशत बढ़कर 2019-20 के 41,628 करोड़ रु. से 2020-21 में 46,239 करोड़ रु. हो गया। वहीं, सामाजिक सेवाओं पर व्यय 10.4 प्रतिशत बढ़ा और 2020-21 में 2019-20 के 57,816 करोड़ रु. से 63,808 करोड़ रु. हो गया।
    • वर्ष 2020-21 में आर्थिक सेवाओं में गत वर्ष से 10.8 प्रतिशत वृद्धि हुई। यह 2019-20 के 26,571 करोड़ रु. से 2020-21 में 29,445 करोड़ रु. हो गया।
    • पूंजीगत लेखे में कुल प्राप्ति 25.9 प्रतिशत बढ़कर 2019-20 के 29,175 करोड़ रु. से 2020-21 में 36,735 करोड़ रु. हो गई। कुल पूंजीगत व्यय 30.5 प्रतिशत बढ़ा और 2020-21 में 2019-20 के 20,080 करोड़ रु. से 26,203 करोड़ रु. पहुंच गया।
    • बिहार को केंद्र सरकार से संसाधनों का कुल अंतरण 2019-20 के 91,654 करोड़ रु. से बढ़कर 2020-21 में 98,128 करोड़ रु. हो गया।
    • राज्य सरकार की कुल बकाया देनदारी 2020-21 में 2,27,196 करोड़ रु. थी। वर्ष 2020 21 में यह बकाया देनदारी सकल राज्य घरेलू उत्पाद का 36.7 प्रतिशत थी। संचित निधि के खाते में उधार लेने के कारण लोक ऋण की देनदारी 2020-21 में कुल देनदारी का 78.0 प्रतिशत थी।
    • वर्ष 2020-21 में वेतन और पेंशन पर राज्य सरकार का कुल व्यय राज्य सरकार के राजस्व व्यय का 29.7 प्रतिशत और राजस्व प्राप्ति का 32.4 प्रतिशत था।

अध्याय 3 : कृषि एवं सहवर्ती क्षेत्र

    • गत पांच वर्षों (2016-17 से 2020-21) के दौरान कृषि एवं सहवर्ती क्षेत्र की वृद्धि दर 2.1 प्रतिशत थी।
    • गत पांच वर्षों के दौरान उप-क्षेत्रों में पशुधन की वृद्धि दर 10 प्रतिशत और मत्स्यपालन की 7 प्रतिशत थी।
    • कुल मिलाकर 2020-21 में सकल राज्यगत मूल्यवर्धन (जीएसवीए) में इस क्षेत्र का 19 प्रतिशत हिस्सा था।
    • वर्ष 2020-21 में राज्य में खाद्यान्नों का कुल उत्पादन रिकॉर्ड 17.95 लाख टन अनुमानित था। गत तीन वर्षों (2018-19 से 2020-21) में अनाजों के बीच चावल की वृद्धि दर 9.6 प्रतिशत, और मक्का की 5.0 प्रतिशत थी।
    • कृषि पहलकदमियों के फलस्वरूप 2012 से अब तक राज्य ने 5 कृषि कर्मण पुरस्कार जीते हैं। राज्य सरकार राज्य के 13 जिलों में जैविक पट्टी विकसित कर रही है।
    • बागवानी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए 23 जिलों में समेकित बागवानी विकास मिशन के साथ-साथ 15 जिलों में मुख्यमंत्री बागवानी विकास योजना का क्रियान्वयन कर रही है।
    • डिजिटल कृषक सेवाएं देने के लिए कृषि विभाग द्वारा एक नए मोबाइल ऍप बिहान की शुरुआत की गई है।
    • वर्ष 2019-20 में सकल फसल क्षेत्र 72.97 लाख हेक्टेयर था और फसल सघनता 144 प्रतिशत थी। वर्ष 2019-20 में सकल सिंचित क्षेत्र 54.35 लाख हे. था।
    • ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान के तहत 669.93 लाख घनमीटर जल संग्रहण क्षमता के साथ कुल 1.21 लाख हेक्टेयर सिंचाई क्षमता सृजित की गई है।
    • वर्ष 2020-21 में मछली के रिकॉर्ड 6.83 लाख टन उत्पादन के साथ राज्य मछली उत्पादन में लगभग आत्मनिर्भर हो गया है।
    • बिहार में दूध का कुल उत्पादन 2020-21 में 115.01 लाख टन था।
    • राज्य में मुर्गीपालन क्षेत्र का प्रशंसनीय प्रदर्शन रहा है। कुल अंडा उत्पादन 32.4 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज करते हुए 2016-17 के 111.17 करोड़ से बढ़कर 2020-21 में 301.32 करोड़ हो गया।

अध्याय 4 : उद्यमिता क्षेत्र

    • वर्ष 2015-16 से 2019-20 के बीच सकल राज्यगत मूल्यवर्धन में औद्योगिक क्षेत्र का योगदान बिहार और भारत दोनो में घटा है। इसमें बिहार में मामूली (20.3 प्रतिशत से 20.1 प्रतिशत) कमी हुई, लेकिन भारत के मामले में काफी (31.6 प्रतिशत से 29.6 प्रतिशत) कमी हुई।
    • वार्षिक औद्योगिक सर्वेक्षण (एएसआइ) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2011-12 से 2018-19 के बीच बिहार में निवल मूल्यवर्धन की वृद्धि दर 19.2 प्रतिशत और स्थिर पूंजी वृद्धि दर 21.0 प्रतिशत रही है।
    •  वर्ष 2020-21 में 460.20 लाख क्विंटल ईख पेरी गई जिससे 46.22 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन हुआ। फलतः चीनी प्राप्ति की दर 10.0 प्रतिशत थी।  
    • राज्य सरकार को अप्रैल 2017 से दिसंबर 2021 तक कुल 54,761.41 करोड़ रु. निवेश के 1918 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों में से 342 इकाई अभी तक क्रियान्वित हो चुके हैं और उनमें 10.8 हजार श्रमिकों को रोजगार मिल रहा है।
    • बिहार में तीन सर्वाधिक आकर्षक उद्योग ईथेनॉल, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा हैं।
    • दिसंबर 2021 तक ईथेनॉल क्षेत्र में कुल 32,454.16 करोड़ रु. निवेश वाली 159 इकाइयों को प्रथम चरण की अनापत्ति प्राप्त हुई। बिहार में कुल निवेश में इसका 57 प्रतिशत हिस्सा है।
    • वर्ष 2020-21 में राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों की 71 उत्पादन इकाइयों में कुल 1904.78 करोड़ रु. का निवेश किया गया।
    • वर्ष 2020-21 में खाद्य प्रसंस्करण में 1761.28 करोड़ रु. का निवेश किया गया जो गत वर्ष की अपेक्षा लगभग 10 गुना है।
    • दिसंबर 2021 तक स्टार्ट अप के लिए 23,341 आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनमें से 4987 इनक्यूबेशन के स्तर तक पहुंचे हैं। इस नीति के तहत बिहार नवांकुर (स्टार्ट-अप) कोष न्यास ने 185 नवांकुरों को प्रमाणित किया है, और इनमें से 143 को पहली किश्त के बतौर कुल 585.37 लाख रु. का वित्तीय अनुदान प्राप्त हुआ है।
    • वर्ष 2020-21 में खनिजों से राज्य सरकार का राजस्व संग्रहण 2016-17 के 994.10 करोड़ रु. से बढ़कर 1708.90 करोड़ रु. हो गया। इसका अर्थ पांच वर्षों में 172 प्रतिशत की वृद्धि है।

अध्याय 5 : श्रम, रोजगार तथा कौशल

    • वर्ष 2019-20 में निर्भरता अनुपात बिहार में सर्वाधिक 62.0 प्रतिशत था जबकि राष्ट्रीय औसत 46.4 प्रतिशत था। बिहार में उच्च कुल प्रजनन दर को देखते हुए राज्य की आबादी में 46 प्रतिशत बच्चे हैं।
    • वर्ष 2019-20 में शहरी बिहार में बेरोजगारी अनुपात पुरुष श्रमशक्ति के लिए 8.9 प्रतिशत और महिला श्रमशक्ति के लिए 12.6 प्रतिशत था जो ग्रामीण बिहार की अपेक्षा अधिक था।
    • वर्ष 2019-20 में बिहार में 59.9 प्रतिशत पुरुष श्रमिक स्वनियोजित थे।
    • इसी प्रकार 30.8 प्रतिशत पुरुष श्रमिक अनियमित श्रमिक थे जो अपनी आजीविका के लिए मुख्यतः अनियमित मजदूरी की कमाई पर निर्भर थे।
    • महिला श्रमिकों के मामले में 51.7 प्रतिशत स्वनियोजित श्रमिकों में से 22.9 प्रतिशत आर्थिक क्रियाकलापों में घरेलू उद्यमों में सहायक के रूप में लगी थीं।

अध्याय 6 : अधिसंरचना एवं संचार

    • गत दशक (2011-20) के दौरान देश में परिवहन, भंडारण एवं संचार क्षेत्र में सर्वाधिक 14.4 प्रतिशत की वृद्धि दर बिहार में दर्ज हुई।
    • महामारी के वर्ष (2020-21 ) में जहां इस क्षेत्र में देश के अन्य राज्यों की वृद्धि दरें ऋणात्मक थीं, वहीं बिहार की 10.3 प्रतिशत वृद्धि दर देश में सर्वाधिक थी।
    • परिवहन क्षेत्र गत दशक (2011 से 2021) में 10.7 प्रतिशत की उच्च वार्षिक दर से बढ़ता रहा है।
    • सड़क एवं पुल पर किया गया सार्वजनिक निवेश 2020-21 में डेढ़ दशक पूर्व से 15-गुनी वृद्धि दर्ज करते हुए 6575 करोड़ रु. पहुंच गया। फलतः प्रति 1000 वर्ग किमी भौगोलिक क्षेत्रफल पर 3086 किमी पथ घनत्व के साथ देश में केरल (6617 किमी) और पश्चिम बंगाल (3708 किमी) के बाद बिहार का ही स्थान है। राष्ट्रीय औसत 1617 किमी प्रति 1000 वर्ग किमी है।

अध्याय 7 : ऊर्जा क्षेत्र 

    • राज्य में बिजली की प्रति व्यक्ति खपत 2014-15 के 203 किलोवाट-आवर से बढ़कर 2020-2021 में 350 किलोवाट-आवर हो गई जो 6 वर्षों में 72.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
    • अनुमानित चरम मांग में भी काफी वृद्धि हुई जो 2014-15 के 2831 मेगावाट से लगभग 109.5 प्रतिशत बढ़कर 2020-21 में 5932 मेगावाट हो गई।
    • राज्य में 2016-17 में बिजली की पूरी खपत 2.16 हजार करोड़ यूनिट थी जो 2020-21 में बढ़कर 3.14 हजार करोड़ यूनिट हो गई। इसका अर्थ चार वर्षों में 45 प्रतिशत की वृद्धि है।
    • वर्ष 2019-20 में राज्य में बिजली की उपलब्ध क्षमता 6073 मेगावाट थी जो 5.7 प्रतिशत बढ़कर 2020-21 में 6422 मेगावाट हो गई। बिजली की बढ़ी हुई मांग की पूर्ति के लिए 2023-24 तक विभिन्न स्रोतों से 6607 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता चरणबद्ध ढंग से बढ़ाने की योजना राज्य सरकार पहले ही बना चुकी है।
    • बिहार में वितरण व्यवस्था दो वितरण कंपनियों के जिम्मे है उत्तर बिहार विद्युत वितरण कंपनी लि. और दक्षिण बिहार विद्युत वितरण कंपनी लि.। मार्च 2021 तक ये कंपनियां 2016-17 के 103.4 लाख के बजाय 169.4 लाख से भी अधिक विद्युत उपभोक्ताओं को सेवा दे रही थीं जो चार वर्षों में 63.8 प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है।
    • बिहार राज्य जलविद्युत निगम लि. राज्य में जलविद्युत परियोजनाओं के विस्तार का प्रेक्षण करता है। राज्य में अभी 13 लघु जलविद्युत परियोजनाएं चालू हैं जिनकी कुल स्थापित क्षमता 54.3 मेगावाट है
    • 10 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए निगम ने विद्युत संयंत्रों को भवनों की छतों, खाली जमीन, पावर चैनलों और टेलरेस चैनलों पर सौर संयंत्र स्थापित करने का निर्णय लिया है।
    • सौर संयंत्रों की स्थापना के लिए नोडल अभिकरण ब्रेडा (बिहार नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण) द्वारा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार की जा रही है।

अध्याय – 8 : ग्रामीण विकास

    • प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) द्वारा पात्र परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के मामले में उपलब्धि लक्ष्य से बढ़ गई है। योजना का व्यय विगत वर्षों के दौरान बढ़ता गया है और 2015-16 के 1275.9 करोड़ रु. से 2020-21 में 9856.7 करोड़ रु. पहुंच गया है। यह पांच वर्षों में लगभग आठगुनी वृद्धि है।
    • ग्राम पंचायतों द्वारा सौर स्ट्रीटलाइट योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। यह योजना महत्वाकांक्षी ‘स्वच्छ गांव, समृद्ध गांव’ कार्यक्रम की हिस्सा है जिसका लक्ष्य सभी गांवों में सोलर लाइट लगवाना है। इसका क्रियान्वयन 2021-22 और 2022-23 में किया जाएगा और अगले पांच वर्षों तक उनका रखरखाव किया जाएगा।
    • बिहार नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (ब्रेडा) द्वारा अभिकरणों को सूचीबद्ध किया जाएगा जो ग्राम पंचायतों द्वारा चिन्हित स्थानों पर सोलर लाइट लगाकर योजना के क्रियान्वयन करेंगे। योजना का संभावित व्यय 2000 करोड़ रु. है।

अध्याय -9: नगर विकास

    • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार बिहार में शहरीकरण का स्तर मात्र 11.3 प्रतिशत था। लेकिन शहरी केंद्र को पुनर्परिभाषित करने के बाद बिहार में शहरीकरण का वर्तमान स्तर 15.3 प्रतिशत हो गया है जो सराहनीय वृद्धि को दर्शाता है।
    • साथ ही, 32 पुराने नगर पंचायतों को नगर परिषदों में और 5 पुराने नगर परिषदों को नगर निगमों में उत्क्रमित किया गया है। वहीं, 12 नगर परिषदों के अधिकार-क्षेत्र का विस्तार किया गया है।
    • नगरपालिकाओं की स्थापना, उत्क्रमण और क्षेत्र विस्तार के फलस्वरूप 284 ग्राम पंचायत पूरी तरह और 205 ग्राम पंचायत आंशिक रूप से शहरी क्षेत्रों में शामिल हो जाएंगे।
    • राज्य सरकार का नगर विकास का व्यय 2015-16 में 1648.50 करोड़ रु. था जो पांच वर्षों में 68 प्रतिशत बढ़कर 2019-20 में 2765.90 करोड़ रु. हो गया। इसी प्रकार, आवास के लिए व्यय 2015-16 में 1485.70 करोड़ रु. था जो उतनी ही अवधि में लगभग चौगुना होकर 2019-20 में 5657.90 करोड़ रु. हो गया।
    • वर्ष 2021-22 तक पाइपलाइन के जरिए शहरी क्षेत्रों के सभी घरों में साफ और सुरक्षित पेयजल का कनेक्शन उपलब्ध कराने के लिए राज्य सरकार द्वारा ‘हर घर नल का जल’ योजना की शुरुआत की गई है।
    • इस योजना के तहत सारे चापाकलों को हटाने का लक्ष्य है जिन पर शहरी आबादी अभी अपनी पानी संबंधी जरूरतों के लिए निर्भर है। अनुमान है कि इस कार्यक्रम से लगभग 15.85 लाख परिवारों को लाभ होगा।
    • 4 कोविड-19 महामारी के कारण राष्ट्रीय नगर आजीविका मिशन (नुल्म) की उपलब्धियां प्रभावित हुई हैं मिशन के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों की संख्या 2019-20 के 4542 से घटकर 2020-21 में 2876 रह गई।
    • राष्ट्रीय नगर आजीविका मिशन के दीनदयाल अंत्योदय योजना के तहत गठित स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों की संख्या भी 2019-20 में 42,351 से घटकर 2020-21 में 28,759 रह गई। 
    • 5 वित्तीय समावेश एवं स्वरोजगार कार्यक्रम (फाइसेप) के तहत लाभार्थियों की अच्छी-खासी संख्या रही दिखती है जो 2018-19 में 2891, 2019-20 में 1984 और 2020-21 में 1848 थी। वर्ष 2018-19 में 208 स्वयं सहायता समूहों का ऋण-संपर्क कराया गया था जिनकी संख्या 2020-21 में लगभग चौगुनी होकर 821 हो गई।
    •   2018 में 2.71 लाख शौचालयों का निर्माण हुआ था जिनकी संख्या 2020 में 4.00 लाख और 2021में सितंबर तक 4.10 लाख हो गई। व्यक्तिगत शौचालयों के लिए राज्य सरकार हर परिवार को 4,000 रु. की केंद्रीय सहायता के अलावा 8,000 रु. की सब्सिडी देती है। अभी तक सभी 142 शहरी केंद्र और सभी 3367 वार्ड खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित हो चुके हैं।

अध्याय – 10 : बैंकिंग और सहवर्ती क्षेत्र

    • राज्य में 2020-21 में प्रमुख बैंकों की कुल 270 नई शाखाएं खोली गई। वर्ष 2020-21 में नई खुली 270 शाखाओं में से 43.3 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में, 23.3 प्रतिशत अर्ध-शहरी क्षेत्रों में, 21.9 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में और 11.5 प्रतिशत महानगरों में खुली।
  1.  
    • बैंकों की कुल संख्या में बिहार का हिस्सा देश में अपनी जनसंख्या के हिस्से (8.6 प्रतिशत) से काफी कम है जो दर्शाता है कि बिहार में वित्तीय सेवाओं के लिए किसी बैंक शाखा पर निर्भर लोगों की औसत संख्या अन्य राज्यों की अपेक्षा काफी अधिक है।
  2.  
    • अनुसूचित व्यावसायिक बैंको की देश भर में शाखाओं की संख्या में मार्च 2007 में बिहार का हिस्सा 5.0 प्रतिशत था जो मार्च 2021 में घटकर 4.9 प्रतिशत रह गया।
  3.  
    • बिहार का ऋण-जमा अनुपात 2019-20 के 36.1 प्रतिशत से बढ़कर 2020-21 में 41.2 प्रतिशत हो गया। वहीं, संपूर्ण भारत के स्तर पर ऋण-जमा अनुपात इस अवधि में 76.5 प्रतिशत से घटकर 71.7 प्रतिशत रह गया।
  4.  
    •  राज्य में जिलों के ऋण-जमा अनुपात के बीच काफी अंतर है। वर्ष 2020-21 में एकमात्र पूर्णिया जिले का ऋण-जमा अनुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक था। पूर्णिया का ऋण-जमा अनुपात सर्वाधिक 81.8 प्रतिशत और मुंगेर का सबसे कम 28.0 प्रतिशत था।

अध्याय 11 : मानव विकास

    • राज्य सरकार के कुल व्यय में सामाजिक सेवाओं पर व्यय का हिस्सा 2015-16 के 34.4 प्रतिशत से बढ़कर 2020-21 में 44.0 प्रतिशत हो गया है।
  1.  
    • इस अवधि में स्वास्थ्य पर व्यय की वृद्धि दर संपूर्ण भारत के 13.8 प्रतिशत की तुलना में 16.6 प्रतिशत रही।
  2.  
    • इसी प्रकार, उन वर्षों के दौरान शिक्षा में भी बिहार में 14.3 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज हुई और यह भी संपूर्ण भारत की 10.9 प्रतिशत वृद्धि दर से अधिक है।
  3.  
    • बिहार और भारत की जनसंख्या के अनुमान का तुलनात्मक विश्लेषण दर्शाता है कि 2036 तक कार्यशील आबादी (15-59 वर्ष) का हिस्सा बिहार में अपेक्षाकृत अधिक होगा।
  4.  
    • कार्यशील आबादी का हिस्सा 2011 के 53.5 प्रतिशत से बढ़कर 2036 में 61.4 प्रतिशत हो जाने का अनुमान है।
  5.  
    • दूसरी ओर बिहार में बुजुर्ग आबादी का हिस्सा धीमी गति से बढ़ेगा। बिहार में बुजुर्ग आबादी 2011 के 6.3 प्रतिशत से बढ़कर 2036 में 10.9 प्रतिशत हो जाएगी अर्थात 4.6 प्रतिशत अंकों की वृद्धि होगी, जबकि भारत में यह वृद्धि 6.6 प्रतिशत अंकों की होगी।
  6.  
    • बिहार में जन्मकालीन जीवन संभाव्यता में एक वर्ष की वृद्धि दर्ज हुई है जो 2010-14 के 68.1 वर्ष से 2014-18 में 69.1 वर्ष हो गई है।
  7.  
    • संस्थागत प्रसवों की संख्या 2014-15 के 14.98 लाख से बढ़कर 2019-20 में 16.47 लाख हो गई थी जो छ: वर्षों में 10.2 प्रतिशत वृद्धि दर्शाती है। वर्ष 2019 की प्रतिदर्श निबंधन प्रणाली (एसआरएस) के अनुसार, बिहार में शिशु मृत्यु दर 29 मृत्यु प्रति 1000 जीविक प्रसव है जो राष्ट्रीय आंकड़े (30) से कम है।
  8.  
    • वर्ष 2020-21 में कुल राज्य बजट में महिलाओं पर व्यय का हिस्सा 16.0 प्रतिशत था। वहीं, 2020-21 में सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत में महिलाओं के लिए कुल परिव्यय 3.7 प्रतिशत था।

अध्याय – 12 : बाल विकास

    • अनुमानों के अनुसार, बिहार में 0 से 18 वर्ष उम्र समूह वाले बच्चों की आबादी का कुल आबादी में 42 प्रतिशत हिस्सा है। वहीं, देश में बच्चों की कुल आबादी में बिहार के बच्चों का 12 प्रतिशत हिस्सा है।
  •  
    • अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 5.18 करोड़ बच्चे हैं जिनमें से 4.66 करोड़ (89.9 प्रतिशत) ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं और 0.53 करोड़ (10.1 प्रतिशत) शहरी क्षेत्रों में। लैंगिक आधार पर बिहार में 2.45 करोड़ लड़कियां हैं और 2.73 करोड़ लड़के।
  •  
    • बिहार की कुल आबादी में किशोर-किशोरियों का 19.8 प्रतिशत हिस्सा है।
  •  
    • नौ में से चार प्रमंडलों पटना (864), पूर्णिया (871), मगध (911) और सारण (930) – में किशोरवय लिंग अनुपात राज्य के औसत (854) से अधिक है।
  •  
    • बिहार में बाल बजट निर्माण की प्रक्रिया 2013-14 में शुरू हुई। बाल बजट में सभी बाल कल्याण योजनाओं का वित्तीय विवरण शामिल होता है। पिछले सात वर्षों के दौरान बिहार में बच्चों पर व्यय में लगातार वृद्धि हुई है।
  •  
    • इन सात वर्षों के दौरान बाल विकास पर व्यय का औसत हिस्सा राज्य के कुल बजट का लगभग 14.2 प्रतिशत था। इसी प्रकार, सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के बतौर व्यय का औसत हिस्सा 4 प्रतिशत के आसपास था।
  •  
    • अभी समेकित बाल विकास सेवा (आइसीडीएस) राज्य के सभी 38 जिलों में 544 परियोजना कार्यालयों के जरिए चल रही है।
  •  
    • समेकित बाल विकास सेवा द्वारा दी जाने वाली सेवा में सुधार और कार्यक्रम के तत्काल अनुश्रवण के लिए अभी सभी 38 जिलों में ‘पोषण ट्रैकर’ एप्प का उपयोग किया जा रहा है।

 

अध्याय 13 : पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं आपदा प्रबंधन

    • पर्याप्त और समय पर होने के लिहाज से वर्षा में होने वाला अंतर वैश्विक तापन का एक प्रत्यक्ष प्रभाव है।
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    • वर्ष 2020 में बिहार में 1385 मिमी वर्षा हुई जो दीर्घकालिक औसत वर्षा से लगभग 37 प्रतिशत अधिक है।
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    • वर्ष 2020-21 में बिहार के कृषिजनित सकल राज्य घरेलू उत्पाद में वानिकी एवं काष्ठ उत्पादन लगभग 7.9 प्रतिशत योगदान था। वर्ष 2020-21 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग का कुल व्यय 25.1 प्रतिशत वृद्धि दर दर्ज करते हुए 2016-17 के 355.88 करोड़ रु. से 693.97 करोड़ रु. हो गया।
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    • जल-जीवन-हरियाली मिशन के तहत 2020-21 में लगभग 3.92 करोड़ पौधे लगाए गए और मृदा एवं नमी संरक्षण कार्य के तहत 4436 हेक्टेयर वन क्षेत्र को उपचारित किया गया।
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    • बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पटना में पांच तथा गया, मुजफ्फरपुर और हाजीपुर एक-एक सतत परिवेशीय वायु गुणवत्ता अनुश्रवण केंद्रों (सीएएक्यूएमएस) की स्थापना की है।
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    • बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पटना में वायु प्रदूषण के बिखरे स्रोतों की पहचान करने और उनसे निपटने के लिए स्वच्छ वायु डैशबोर्ड की शुरुआत की है।
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    • राज्य सरकार ने एक बार उपयोग वाले प्लास्टिक के सामानों और संबंधित स्थानापन्न चीजों पर पूरे राज्य में प्रतिबंध लगा दिया है। राजगिर के नेचर सफारी का उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री द्वारा 26 मार्च, 2021 को किया गया था।
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    • 2020-21 में बाढ़ के कारण राज्य के कुल 19 जिले प्रभावित हुए और फसल उत्पादन को 727.88 करोड़ रु. का नुकसान हुआ। समुदाय को वास्तव में 20 किमी दायरे में बिजली गिरने के कम से कम 40 मिनट पहले चेतावनी दे देने के लिए चेतावनी प्रणाली के तहत एक मोबाइल ऍप ‘इंद्रवज्र’ विकसित किया गया है। 

 

बिहार में कृषि का विकास: आर्थिक सर्वेक्षण 2021

 

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